कश्मीर में आतंकवाद के टॉप कमांडर रियाज नायकू को सुरक्षा बलों ने बुधवार को मार गिराया। पुलवामा में नायकू के गांव बेघपोरा में एक एनकाउंटर के दौरान नायकू मारा गया। सुरक्षा बलों को बेघपोरा गांव में नायकू और उसके कुछ साथियों की मौजूदगी का इनपुट मिला था। मंगलवार को उस घर के बाहर घेराबंदी की गई थी, जहां नायकू के छिपे होने की खबर मिली थी। हालांकि, शुुरुआत में घेराबंदी करने पर किसी तरह की फायरिंग नहीं हुई। इसके बाद भी सुरक्षाबलों ने घेराबंदी नहीं हटाई और ऑपरेशन पूरे दिन चलता रहा।

बुधवार सुबह आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। नायकू पहले घर की छत पर बने एक ठिकाने में छिपा हुआ था। फिर वह सुरक्षा बलों पर फायर करते हुए नीचे उतरा। उसका मारा जाना सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी है। कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान पर इसका अच्छा खासा असर पड़ेगा। रियाज नायकू कश्मीर में सबसे ज्यादा समय तक सक्रिय रहने वाला आतंकी था। वह हिजबुल मुजाहिद्दीन के लिए काम करता था। उसे मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की ए++ कैटेगरी में रखा गया था। उस पर 12 लाख रुपए का इनाम भी था।

बुरहान वानी के बाद नायकू हिजबुल कमांडर बना
35 साल का नायकू मैथ्स टीचर था। बाद में मोस्ट वॉन्टेड आतंकी कमांडर बन गया। 2016 में बुरहान वानी के एनकाउंटर के तुरंत बाद नायकू ही हिजबुल का कमांडर बना था। बुरहान की तरह नायकू भी आतकंवाद फैलाने के लिए सोशल मीडिया का खूब इस्तेमाल करता था। वह कश्मीर के पुलवामा का ही रहने वाला था और सुरक्षा बलों की हिट लिस्ट में पहले नंबर पर था।

नायकू कई बार एनकाउंटर के दौरान बच निकला था
कई बार नायकू बंदूक लहराते हुए आतंकियों के जनाजे में गन सैल्यूट देते नजर आया था। उसने सोशल मीडिया पर लंबे-लंबे ऑडियो और वीडियो मैसेज भी पोस्ट किए थे। यह पहला मौका नहीं था, जब नायकू को सेना ने घेरा था। इससे पहले वह कई बार बीच एनकाउंटर में घेराबंदी से बचकर निकल चुका था। 2018-19 के बीच वह कई बार एनकाउंटर से भाग निकला था।

खेत और रेलवे ट्रैक खोदकर देखा गया कि सुरंगें तो नहीं हैं
मंगलवार रात को इंटेलिजेंस का पुख्ता इनपुट था। इसके बाद इलाके के आसपास कई सारे खेत, रेलवे ट्रैक की खुदाई की गई कि कहीं कोई सुरंग या जमीन के भीतर आंतकी ठिकाना न हो। मंगलवार रात एक बजे सर्च ऑपरेशन तो बंद कर दिया, लेकिन घेराबंदी नहीं हटाई गई। सुबह 9 बजे आतंकी की ओर से गोलीबारी शुरू हो गई।

नायकू बीमार मां से मिलने आया था
नायकू अपने गांव अपनी बीमार मां से मिलने आया था। कहा जाता है नायकू अपने चुनिंदा करीबी लोगों के अलावा किसी पर भरोसा नहीं करता था। शायद यही वजह थी कि वह बचा रहा। उसने कई स्थानीय लोगों को आतंकी बनाया। कश्मीर में 35 आतंकी संगठन सक्रिय हैं। 10 से ज्यादा आतंकी इस साल हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल हुए हैं